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Bihar Political News: बिहार में 20 नई लोकसभा सीटों का प्रस्ताव, 40 से बढ़कर 60 हो सकती हैं सीटें

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Alam Ki Khabar: प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के वर्किंग पेपर ड्राफ्ट में बिहार की 40 लोकसभा सीटों को बढ़ाकर 60 करने का प्रस्ताव सामने आया है। जानिए किन सीटों में बदलाव की सिफारिश की गई है।

पटना, 8 जुलाई। आलम की खबर: बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकने वाला एक अहम प्रस्ताव सामने आया है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के एक वर्किंग पेपर ड्राफ्ट में बिहार की वर्तमान 40 लोकसभा सीटों को बढ़ाकर 60 करने का सुझाव दिया गया है। प्रस्ताव के अनुसार राज्य की 10 प्रमुख लोकसभा सीटों को तीन-तीन हिस्सों में पुनर्गठित किया जाएगा। यदि भविष्य में यह मसौदा विधायी प्रक्रिया पूरी कर कानून का रूप लेता है तो बिहार को लोकसभा में 20 अतिरिक्त सांसद मिलेंगे और राज्य का संसदीय प्रतिनिधित्व पहले से अधिक मजबूत हो जाएगा। हालांकि फिलहाल यह केवल एक वर्किंग पेपर ड्राफ्ट है, इस पर अभी कोई अंतिम सरकारी निर्णय नहीं हुआ है। सूत्रों के अनुसार प्रस्ताव पर संसद के आगामी मानसून सत्र में चर्चा की संभावना जताई जा रही है, लेकिन अंतिम फैसला संसद की मंजूरी और राजनीतिक सहमति के बाद ही होगा। ड्राफ्ट में देशभर में कुल 281 नई लोकसभा सीटें जोड़ने का सुझाव दिया गया है, जिससे लोकसभा की कुल सदस्य संख्या 543 से बढ़कर 824 हो सकती है। इस मॉडल को प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य शमिका रवि ने तैयार किया है। इसमें केवल जनसंख्या ही नहीं बल्कि संसदीय क्षेत्र का भौगोलिक विस्तार, शहरी आबादी का घनत्व, अनुसूचित जाति और जनजाति की आबादी, भाषाई विविधता, मतदान केंद्रों की संख्या तथा मतदान प्रतिशत सहित सात प्रमुख मानकों को आधार बनाया गया है। वर्ष 2009 से 2024 तक के लोकसभा चुनावों के आंकड़ों और सामाजिक-राजनीतिक समीकरणों का भी अध्ययन किया गया है। बिहार में जिन 10 लोकसभा क्षेत्रों को तीन हिस्सों में विभाजित करने का सुझाव दिया गया है उनमें पटना साहिब, पाटलिपुत्र, मुंगेर, आरा, बेगूसराय, सारण, दरभंगा, मधुबनी, झंझारपुर और महाराजगंज शामिल हैं। यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो इन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व मौजूदा 10 सांसदों के स्थान पर 30 सांसद करेंगे। ड्राफ्ट में देशभर के 373 संसदीय क्षेत्रों को यथावत रखने, 59 सीटों को दो भागों तथा 111 सीटों को तीन भागों में पुनर्गठित करने का सुझाव भी दिया गया है। झारखंड के लिए भी राजमहल, गिरिडीह, लोहरदगा और गोड्डा लोकसभा क्षेत्रों में बदलाव का प्रस्ताव रखा गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भविष्य में यह प्रस्ताव लागू होता है तो बिहार की चुनावी रणनीति, सामाजिक समीकरण और संसदीय राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल यह केवल एक सुझावात्मक मसौदा है और इस पर अंतिम निर्णय होना अभी बाकी है।

परिसीमन पर बढ़ी बहस, अंतिम फैसला अभी बाकी

लोकसभा सीटों के पुनर्गठन का यह प्रस्ताव बिहार की राजनीति में नई चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि यह अभी केवल एक वर्किंग पेपर है, इसलिए इसे अंतिम निर्णय मानना उचित नहीं होगा। यदि भविष्य में सरकार इस दिशा में आगे बढ़ती है तो व्यापक राजनीतिक सहमति और संसदीय प्रक्रिया के बाद ही कोई बदलाव लागू होगा।

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